बच्चों को ब्रेसेज़ कब लगवाने चाहिए? माता-पिता के लिए ज़रूरी जानकारी

बच्चों को ब्रेसेज़ कब लगवाने चाहिए? माता-पिता के लिए ज़रूरी जानकारी

“क्या मेरे बच्चे को ब्रेसेज़ लगवाने चाहिए?” क्लिनिक में यह सवाल मुझसे हफ़्ते में कई बार पूछा जाता है। कभी जवाब सामने दिख रहा होता है, टेढ़े-मेढ़े दांत या बहुत ज़्यादा ओवरबाइट। कभी इतना साफ़ नहीं होता। सही जवाब तब मिलता है जब ऑर्थोडॉन्टिस्ट या डेंटिस्ट बच्चे को ठीक से देखे।

पहले चेकअप से लेकर इलाज पूरा होने तक, यहां सब कुछ बता रहा हूं।

पहला चेकअप कब करवाएं

करीब 7 साल की उम्र। सुनने में जल्दी लगता है, क्योंकि 7 साल के बच्चों के तो अभी दूध के दांत और पक्के दांत दोनों होते हैं। लेकिन यही सही वक्त है।

मैं इस उम्र में जबड़े की बनावट देख सकता हूं, पक्के दांत किस तरफ़ बढ़ रहे हैं वो समझ आता है। तालू छोटा है, क्रॉसबाइट है, दांतों में बहुत ज़्यादा भीड़ है, ये सब शुरू में पकड़ना आसान होता है। जबड़ा अभी बढ़ रहा होता है तो बहुत कुछ ठीक किया जा सकता है।

लेकिन जल्दी चेकअप का मतलब जल्दी ब्रेसेज़ नहीं।

ज़्यादातर मामलों में मैं कहता हूं, “अभी देखते रहते हैं,” और छह-बारह महीने बाद फिर बुलाता हूं। असल इलाज बाद में शुरू होता है, 9 से 14 साल की उम्र के बीच, जब ज़्यादातर पक्के दांत आ चुके होते हैं।

माता-पिता किन बातों पर ध्यान दें

फ़ॉर्मल चेकअप से पहले ही माता-पिता को कुछ चीज़ें दिखने लगती हैं। ये कुछ बातें हैं जो अक्सर लोगों को क्लिनिक लेकर आती हैं:

  • दांतों में भीड़, एक-दूसरे पर चढ़े दांत, कुछ आगे निकले हुए या पीछे धंसे हुए
  • गैप जो पक्के दांत आने पर भी बंद नहीं हो रहे
  • ऊपर के दांत नीचे वालों से बहुत आगे (ओवरबाइट), नीचे के ऊपर वालों से आगे (अंडरबाइट), या साइड से मिसमैच (क्रॉसबाइट)
  • खाना चबाने में दिक्कत, बच्चा कुछ चीज़ें छोड़ रहा हो या अजीब तरीके से चबा रहा हो
  • मुंह से सांस लेना, जबड़े में दर्द

इनमें से कुछ दिखने का मतलब यह नहीं कि ब्रेसेज़ पक्के हैं। बस चेकअप करवा लीजिए, काम की जानकारी मिल जाएगी। छोटे बच्चों के लिए पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री विज़िट एक अच्छी शुरुआत है।

किस तरह के ब्रेसेज़ मिलते हैं

पहले की तुलना में अब कई विकल्प हैं।

मेटल ब्रेसेज़

अभी भी सबसे आम, खासकर बच्चों और छोटी उम्र के टीनेजर्स के लिए। आज के मेटल ब्रेसेज़ पुराने ज़माने के मुकाबले काफ़ी छोटे और आरामदायक हैं। जटिल दांतों की सीध और बाइट की समस्याओं के लिए ये सबसे अच्छा काम करते हैं। खर्चा भी सबसे कम।

सिरेमिक ब्रेसेज़

सिस्टम वही है, बस ब्रैकेट दांतों के रंग के या पारदर्शी होते हैं। कम दिखते हैं, इसलिए बड़े टीनेजर्स और वयस्कों में लोकप्रिय हैं। मेटल से थोड़ा ज़्यादा खर्चा आता है और साफ़ रखने में मेहनत भी ज़्यादा लगती है।

क्लियर एलाइनर

निकालने वाली ट्रे (Invisalign सबसे जाना-पहचाना ब्रांड है) जो धीरे-धीरे दांतों को सही जगह लाती हैं। पहनने पर लगभग दिखते ही नहीं।

मगर एक बात: इन्हें दिन में 20 से 22 घंटे पहनना पड़ता है। खाना खाते और ब्रश करते वक्त निकालो, बाकी हमेशा लगे रहें। मैंने देखा है कि समझदार टीनेजर्स के लिए ये अच्छे काम करते हैं। छोटे बच्चों के लिए, या जो बच्चे नियम से नहीं पहनेंगे, पारंपरिक ब्रेसेज़ बेहतर रहते हैं।

डेंटिस्ट या ऑर्थोडॉन्टिस्ट समस्या, बच्चे की उम्र, और नतीजे को ध्यान में रखते हुए सही विकल्प बताएंगे।

इलाज में कितना वक्त लगता है

हर केस अलग होता है। सीधे-साधे केस में कम वक्त लगता है, जटिल बाइट के मामलों में ज़्यादा। कितना वक्त लगेगा यह केस की जटिलता, बच्चे की ग्रोथ, और हिदायतें कितनी अच्छे से फॉलो की जाती हैं, इन सबसे तय होता है।

हर चार से छह हफ्ते में एडजस्टमेंट विज़िट होती है। 15 से 30 मिनट, जल्दी हो जाती है।

ब्रेसेज़ उतरने के बाद रिटेनर लगता है। रिटेनर दांतों को नई जगह पर रोककर रखता है जब तक हड्डी और टिश्यू सेट नहीं हो जाते। पहले कुछ वक्त पूरे दिन पहनना होता है, फिर सिर्फ़ रात में।

इलाज के दौरान रोज़मर्रा की ज़िंदगी

शुरू के कुछ दिन थोड़ा मुश्किल लगता है। दांतों में हल्का दर्द, मुंह को हार्डवेयर की आदत पड़ने में वक्त। नरम खाना मदद करता है: चावल, दाल, दही, सूप, नरम रोटी।

हर टाइटनिंग के बाद एक-दो दिन हल्का दर्द होना सामान्य बात है।

सफ़ाई पर ध्यान देना पड़ता है। ब्रेसेज़ की वजह से खाना फंसने की ज़्यादा जगह बन जाती है, इसलिए हर खाने के बाद ब्रश और तार के बीच फ़्लॉस करना सीखना होगा। इंटरडेंटल ब्रश काफ़ी मदद करता है, क्लिनिक में हम बच्चे को सही तरीका दिखा देते हैं।

सख्त, चिपचिपी, कुरकुरी चीज़ें ब्रैकेट और तार खराब कर सकती हैं। पॉपकॉर्न, सख्त टॉफ़ी, च्यूइंग गम, सेब या भुट्टे को सीधे काटना, ये सब बचाने होंगे।

खर्चे की बात

ऑर्थोडॉन्टिक इलाज सस्ता नहीं होता। खर्चा ब्रेसेज़ के प्रकार, केस की जटिलता, और अवधि पर निर्भर करता है। चेकअप के बाद क्लिनिक पूरा खर्चा बता सकता है और पेमेंट के विकल्पों पर बात हो सकती है।

एक बात जो मैं माता-पिता को बताता हूं: बचपन या टीनेज में, जबड़ा बढ़ रहा होता है तब दांतों की सीध ठीक करना, बड़े होने के बाद वही काम करने से आसान पड़ता है।

अगर सोच रहे हैं कि बच्चे को ब्रेसेज़ की ज़रूरत है या नहीं, तो एक ऑर्थोडॉन्टिक चेकअप करवा लीजिए। चेकअप सिर्फ़ जानकारी के लिए है, इससे इलाज की कोई बाध्यता नहीं बनती। आपको साफ़ तस्वीर मिल जाएगी कि क्या हो रहा है और क्या विकल्प हैं।

Frequently asked questions

  1. बच्चे को पहली बार ऑर्थोडॉन्टिस्ट को कब दिखाना चाहिए?

    करीब 7 साल की उम्र सही रहती है। इस उम्र में डेंटिस्ट जबड़े की बनावट और पक्के दांतों की ग्रोथ देख सकते हैं, जब बच्चे की हड्डियां अभी बढ़ रही होती हैं।

  2. क्या सभी बच्चों को ब्रेसेज़ की ज़रूरत होती है?

    नहीं। बहुत से बच्चों के दांत सीधे और सही तरीके से आ जाते हैं। चेकअप से पता चल जाता है कि आपके बच्चे को इलाज की ज़रूरत है या नहीं।

  3. क्या ब्रेसेज़ में दर्द होता है?

    शुरू के कुछ दिन और हर एडजस्टमेंट के बाद थोड़ी तकलीफ़ होती है। ज़्यादातर बच्चे जल्दी इसके आदी हो जाते हैं।

  4. क्या ब्रेसेज़ लगाकर बच्चा खेल-कूद कर सकता है?

    हां। कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स के लिए ब्रेसेज़ वाला माउथगार्ड लगाना चाहिए। आपके डेंटिस्ट सही तरह का माउथगार्ड बता सकते हैं।

  5. कैसे पता चलेगा कि बच्चे को ब्रेसेज़ चाहिए या दांत खुद ठीक हो जाएंगे?

    कुछ दांतों की समस्याएं पक्के दांत आने पर खुद ठीक हो जाती हैं, कुछ नहीं होतीं। डेंटिस्ट से चेकअप करवाना सबसे अच्छा तरीका है यह जानने का।

  6. बच्चों के लिए मेटल ब्रेसेज़ बेहतर हैं या क्लियर एलाइनर?

    यह केस पर निर्भर करता है और इस बात पर भी कि बच्चा एलाइनर नियम से पहनेगा या नहीं। चेकअप के बाद आपके डेंटिस्ट सही विकल्प बता सकते हैं।

  7. मुज़फ़्फ़रनगर में ब्रेसेज़ का खर्चा कितना आता है?

    यह ब्रेसेज़ के प्रकार और केस की जटिलता पर निर्भर करता है। गर्ग डेंटल क्लिनिक में संपर्क करें, सारी जानकारी मिल जाएगी।